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साहित्य शक्ति संस्थान द्वारा सम्मानित हुए श्रेष्ठ रचनाकार

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 साहित्य शक्ति संस्थान द्वारा सम्मानित हुए श्रेष्ठ रचनाकार  ----------------- देवरिया संवाद,उत्तर प्रदेश (डा0पंकज-प्राणेश) साहित्य शक्ति संस्थान देवरिया का द्वितीय सम्मान समोरह हर्षोल्लास के बीच सम्पन्न हुआ।इस कार्यक्रम मे भारत के कोने-कोने से रचनाकार जुड़े हुए थे।साहित्य शक्ति संस्थान हिन्दी भाषा और साहित्य के निरंतर  उत्थान के लिए,उसके संवर्धन परिवर्धन और संरक्षण के लिए कृत संकल्पित है।इस संस्थान का का मुख्य उद्देश्य नवोदित कवित्व शक्ति सम्पन्न प्रतिभाओं को एक मंच प्रदान करना है।सीखने-सीखाने-सराहने और समझाने के साथ-साथ आपसी प्रेम और भाईचारे के आधार पर यह संस्थान कार्य करते हुए आगे बढ रहा है। इस संस्थान के बैनर तले आज सैकड़ों की संख्या मे जुड़कर रचनाकार अपनी साहित्य साधना कर रहे है। पूरे भारत मे इस संस्थान के वकायदे पदाधिकारी नामित है जो अपने अपने स्तर से इस साहित्य रथ को खींच रहे है।करोना संकट को देखते हुए यह यह सम्मान समारोह स्वतन्त्रता दिवस के पावन अवसर पर अनलाइन संस्थान के ह्वाटसप पटल पर आयोजित किया गया था।इस संस्थान द्वारा कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद जयन्ती के अवसर पर...

कविता:-परी

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 कविता:-परी  वो परियों की दुनिया और  उस परीलोक की शहजादी जैसी मेरी बिटिया । ख्यालों के उपवन में बेखौफ़ कुलाँचे मारता उसके मन का मृग .. बावरे पंछी सा आस्माँ को छूती हजारों हसरतें उसकी । जिन्दगी जाने कब उसे स्वपनलोक से निकालकर  इन दुनियावि हकीकतों के  भंवर जाल में उसे उलझा दे । ये सोच-सोच कर घबराएँ मन मेरा । जब भी देखूं अपनी नन्ही परी को मन करता है कि  तारों को उसके बालों में लगा दूँ जुगनुओं को उसके आस पास उड़ा दूँ । तितलियों के उसे पंख लगा दूँ । बना दूँ उसे एक सुन्दर सी परी । नजर ना लगें उसे एक काला टीका लगा दूँ । स्वरचित मौलिक रचना निर्मला सिन्हा ग्राम जामरी डोंगरगढ़ छत्तीसगढ़ से

भारतीय साहित्य संस्कृति का काव्य संवाद यात्रा कार्यक्रम संपन्न*

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 *भारतीय साहित्य संस्कृति का काव्य  संवाद यात्रा कार्यक्रम संपन्न* साहित्य समाज का दर्पण - महेंद्र सिंह 'राज' ****************************** साहित्यिक सामाजिक संस्था 'भारतीय साहित्य संस्कृति' का 'काव्य संवाद यात्रा' आनलाइन कार्यक्रम दिनांक 14.08.2021 को सफलता पूर्वक संपन्न हुआ। सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त एवं कई एनजीओ से जुड़ी भारतीय साहित्य संस्कृति एक सम्मानित संस्था है। एक ऐसी संस्था जिसका मुख्य उद्देश्य मानव कल्याण, जनजीवन कल्याण, पशुसेवा, रक्तदान, नेत्रदान तथा समाज के कल्याण के लिए प्रयत्नशील रहकर जनमानस में जागरूकता को विकसित करना और संवेदना जगाना है। भारतीय साहित्य संस्कृति भारतीय साहित्य के साथ- साथ भारतीय संस्कृति के उत्थान के लिए सदैव कार्यरत रहता है। यह मंच साहित्य, कला एवं समाज सेवा में समर्पित लोगों को एक नई पहचान देने और उनके उत्कृष्ट कार्यों को प्रकाश में लाने का भरपूर प्रयास करता है।      भारतीय साहित्य संस्कृति  एक साक्षात्कार कार्यक्रम ,काव्य संवाद यात्रा कार्यक्रम का आयोजन करता है । जिसमें समाज की विभिन्न सेवा से जुड़े लोग, उत्कृष्ट साहित...

आचरण शुचिता के साथ देश उत्थान में सहायक बनें - घनश्याम सहाय*

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 *आचरण शुचिता के साथ देश उत्थान में सहायक बनें - घनश्याम सहाय*     आज़ादी की हीरक जयंती पर साहित्यिक संस्था तूलिका बहुविधा मंच पर 15.08.2021 को विराट ऑनलाइन काव्य गोष्ठी का आयोजन काव्य साम्राज्ञी आ.प्रतिभा पाडेय , शकुंतला मित्तल एवं प्रीती देवी के संयोजन में सम्पन्न हुआ। भारत माता के पूजनोपरान्त संयोजन समिति ने सभी अतिथियों का स्वागत तथा साहित्यकारों से अमृत महोत्सव में आत्मीय योगदान का आह्वान किया।संरक्षक आ.घनश्याम सहाय ने कहा कि हमारे देश को आजादी लम्बे संघर्ष के बाद हासिल हुई है ।अतः आचरण की शुचिता व कर्तव्य भावना से हम सभी को देश उत्थान हेतु सहयोग प्रदान करना होगा।      प्रख्यात साहित्यकार डाॅ0 राकेश सक्सेना ने कहा कि हमारी संस्कृति और सभ्यता की समृद्ध परम्परा रही है। इसको ध्यान में रखकर हम सभी को सामूहिक प्रयास से आधुनिक राष्ट्र बनाना है ,क्योंकि राष्ट्र जब उन्नति करता है तो उसी में हम सबकी उन्नति निहित होती है।अध्यक्ष आ.नवलकिशोर सिंह ने ' भूमण्डल में सबसे न्यारा मणिमय देश हमारा ' रचना के माध्यम से राष्ट्र का यशोगान किया। आ.रीतू गुलाटी ऋतम्भरा, अनिल रा...

कविता ॥ मुसीबत जब भी आता है ॥

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 कविता ॥ मुसीबत जब भी आता है ॥ रचना ॥ उदय किशोर साह ॥ मो० पो० जयपुर जिला बाँका बिहार मुसीबत जब भी आता है रूलाकर चला जाता है अपना भी साथ छोड़ जाता है साया भी लुप्त हाे जाता है मुसीबत जब भी आता है रिश्ते नाते छुट जाता है राह में मिलने पर भूल जाता है पहचानने से इन्कार कर जाता है मुसीबत जब भी आता है जग में कोई साथ ना होता है अपना काँधा भी साथ ना होता है किस्मत भी रूठ चला जाता है मुसीबत जब भी आता है अपना भी पराया हो जाता है मदद माँगने जब जाता है चेहरे की रंगत बदल जाता है मुसीबत जब भी आता है बुद्धि भी चरने चला जाता है अच्छे बुरे की पहचान भूल जाता है दिन भी रात नजर आता है मुसीबत जब भी आता है जग बेगाना बन जाता है जीवन सूना सूना हो जाता है अवसाद घर कर जाता है। उदय किशोर साह मो० पो० जयपुर जिला बाँका बिहार 9546115088

राजकीय इंटर कॉलेज मानपुर मुरादाबाद में धूमधाम से मनाया गया आजादी का 75 वाँ अमृत महोत्सव ।

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 राजकीय इंटर कॉलेज मानपुर मुरादाबाद में धूमधाम से मनाया गया आजादी का 75 वाँ  अमृत महोत्सव ।                 इस अवसर पर प्रधानाचार्य डॉ अनुज अग्रवाल ने आजादी के नायकों को नमन किया तथा उनसे प्रेरणा लेकर सार्वजनिक जीवन में कार्य करने का आवाहन छात्र-छात्राओं से किया स्वतंत्र दिवस के अवसर पर स्टूडेंट पुलिस कैडेट कार्यक्रम के छात्र छात्राओं को प्रमाण पत्र एवं पत्रिका का वितरण किया गया कार्यक्रम में डॉ चंद्रभान सिंह हेमेंद्र प्रसाद शर्मा,अचल त्यागी ,सोनिया सिंह , अमित कुमार आदि उपस्थित रहें । रिपोर्ट   शुभम कुमार सुगम प्रहरी संवाददाता की।

जन्मदिवस शुभकामना*

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 *जन्मदिवस शुभकामना* जन्म   दिवस    है   मेरी  पुत्री  का, चाहे    सबका    सदा      आशीष। धन्यवाद    देता     नारायण    को, नमन   करूँ   मैं   नित    जगदीश। वेद   अश्वनी   की    पौत्री    प्यारी, राजन   मिथला    की     तारा   है। नीरज  साधना  पिंकी  शैलेंद्र का पाती     वह     दुलार    सारा   है। स्वाती  विष्णू  चाचा   चाची  भी, देते   हैं    नित    शुभ   आशीष। धन्यवाद    देता   नारायण   को, नमन  करूँ   मैं  नित  जगदीश। शिव गौरी अभिलाष सदा कहते, मामा  मामी  की  वह  प्यारी  है। मान्यता   से   चहकती   रातेपुर, की...

हिन्दू जागरण मंच नजीबाबाद ने मनाया अखंड भारत संकल्प दिवस। नजीबाबाद ने गोकुल सिंह यादव सरस्वती विधा मंदिर में मनाया अखंड भारत संकल्प दिवस

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 स्योहारा प्रहरी से उमेश चौहान की रिपोर्ट। हिन्दू जागरण मंच नजीबाबाद ने मनाया अखंड भारत संकल्प दिवस। नजीबाबाद ने  गोकुल सिंह यादव सरस्वती विधा मंदिर में मनाया अखंड भारत संकल्प दिवस  इस अवसर पर अखंड भारत के मानचित्र की पूजा करने के साथ-साथ लोगों को भारत के गौरवशाली इतिहास के बारे में जानकारी दी। हिन्दू जागरण मंच  बिजनौर के  जिलामहामंत्री गौरव चिकारा ने कहा कि जिस तरह से भारत मां के टुकड़े किए गए, उसे वर्तमान के साथ-साथ हमारी आने वाली पीढ़ी को जानना चाहिए। इस अवसर पर सभी कार्यकर्ता अखंड भारत का संकल्प भी लेंगे। हिन्दू जागरण मंच प्रत्येक वर्ष 14 अगस्त को अखंड भारत दिवस मनाती है। गौरव चिकारा ने कहा कि अखंड भारत में आज के अफगानिस्तान, पाकिस्तान, तिब्बत, नेपाल, भूटान, म्यांमार, बांग्लादेश और श्रीलंका आता है। पिछले 300 वर्षों में आठ बार भारत को खंडित किया गया।  नजीबाबाद खण्ड संयोजक हिमांशु भारद्वाज ने कहा की आज के दिन  भारत   को पुनः अखंड बनाने के लिए भारत के  प्रत्येक नागरिक को संकल्प लेना चाहिए बैठक में  कुछ नवीन दायित्वों की घोषणा की गई...

लघुकथा-:अधिकार

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 लघुकथा-:अधिकार  सुहानी दौड़ते हुए अपनी मम्मी से गले लगकर रोते हुए कहती हैं ।बहुत हुआ मम्मी भैय्या को कहने का कोई हक़   नहीं कि यें घर तुम्हारा नहीं ।तुम तो पराई हो कल तुम्हारी शादी होगी और तुम्हे ये घर छोड़ कर जाना होगा यहाँ तुम्हारा कुछ नहीं क्या यें बात सच है । मम्मी बोलों ना तुम कुछ बोलतीं क्यो नही हो । सुहानी रोते-रोते सिसकने लगतीं हैं उसके गले से रोंधी रोंधी आवाज आती हैं ।सुहानी की मम्मी अनामिका एक गहरे सोंच में डूब जाती हैं उसे अपना बचपना याद आनें लगता हैं ।कि आखिर ये बात है तो सही । कैसे मुझे भी बात बात पर यही बताया जाता था कि आखिर तुम अपने माँ बाप की जितनी भी सेवा कर लो आखिर तुम्हे जाना तो पराये घर हीं हैं । अचानक ही अनामिका के आँखो से आँसू गिरने लगते हैं ।दूर खड़ा उसका पति संजय सब देखते हुए महसूस कर लेता हैं और बातों की डोर कोवही सम्हालते हुए कहता है क्या सुहानी बेटा तुम भी किस नालायक की बातों को पकड़ कर रो रही हो जिसे ये नहीं पता कि घर की कौन सी चीज कहाँ रखी है वो घर उसका कैसे हो सकता है भला ।सभी को समान का अधिकार हैं  राहुल को ऐसा कहने का कोई हक़ नही...

भारत भूमि

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 भारत भूमि  भारत भूमि की शान पर जान भी हम लुटा देंगे । हिमालय की गोद के लिए शीश भी हम कटा देंगे । नहीं यहाँ किसी जांत-पांत  रंग-भेद या धर्म मज़हब से वास्ता हमें । हें एकता सूत्र में बंधे सभी भारत वासी हम। यहाँ प्रकृति भी देती नित नए - नए उपहार हमें । साधु-संतो का लगता यहाँ तांता हैं । राम-कृष्ण भी इसी भूमि में जन्म लेते हैं ।  माँ की ममता के लिए हैं इंसान से देवता भी हैं  तरसते । हें यहाँ कि मिट्टी इतनी पावन गंगा, जमुना, सरस्वती भी यहीं बहती इस भारत भूमि में फिर  आने को दिव्य आत्मायें कठोर तपस्या करती रहती हैं । भारत भूमि के लिए यहाँ बच्चा-बच्चा भी अपना शीश कटा दे। ऐसी पवित्र, निर्मल ,भारत भूमि हैं हमारी ।🙏🙏 ☆ निर्मला सिन्हा  ☆डोंगरगढ़ छत्तीसगढ़

वीर शहीद की गाथा

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 वीर शहीद की गाथा 🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳 जब भी में लिखूँ अपनी कलम को धारदार करके हे वीर शहीदों तुम्हारे   बारे में ही लिखूँ । 🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳 लिखूँ उन नौजवानों के बारे में जो  हँसते-हँसते सूली चढ़ गए भारत माँ के लिए । 🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳 लिखूँ उन अंखियो के बारे में जो राह तख्ते तख्ते बूढ़ी हो गई । 🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳 लिखूँ उन मेंहदी लगे हाथों के बारे  में जो ठीक से अपना सुगंध भी ना फैला सकी और फीकी पड़ गई जीवन में । 🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳 लिखना चाहती हूँ आजादी के दीवानों की दास्ताँ जो मतवाले होकर देश की रक्षा  पर जाते हैं और अपना सब न्यौक्षावर करके भी लोट नहीं पाते हैं । 🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳 लिखना चाहतीं हूँ उस बच्चे की रोती  अंखियों के बारे में जो दिवाली में इंतजार  करता है अपने पापा के आने का। 🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳 लिखना चाहतीं हूँ उस पल को जब भरे  त्यौहार में कफ़न से लिपटा वीर शहीद  आता है । 🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳 लिखना चाहतीं हूँ उस वीर शहीद के नई दुल्हन के  आँखो के पानी को   लिखना चाहतीं हूँ  हूँ ...

शीर्षक - बेटी

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 शीर्षक - बेटी जन्म लेते ही सबका  एक ही कहना बेटी हुई है,  बेटा नहीं पर क्या बेटी  किसी से कम है हर फर्ज निभाती है माता-पिता की सेवा सहित सास-ससुर को भी सम्मान देती है अपनी संस्कृति को सहेज कर समाज को नई राह दिखाती है बेटी है इसलिए दो  कुल की लाज बचाती है मां-बाबा के आंखों का तारा बन उनके सपनों को पूरा करने की  हर कोशिश करती है नयनों में भर आए आंसू भी  तो चुपके से वह पी जाती है बेटी,बहू,बहन हर  किरदार निभाती है कलेजे पर पत्थर रख  अपनों को अपना बनाती है न चाहत आसमान में उड़ने की फिर भी चिड़ियों सी चहचाहती है घर लगे सुना जो बेटी  घर पर न होती है वंश आगे बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाती है फिर क्यों बेटी होने की खुशी  नहीं मनाई जाती है घर,शिक्षा,धर्म या हो राजनीति हर जगह बेटी परचम लहराती है सुई में धागा लगाने से लेकर हवाई जहाज तक उड़ाती है फिर क्यों कुछ जगहों पर  आवाज़ उसकी रौंदी जाती है बेटी है इसलिए तो अपना हर कर्ज चुकाती है। डॉ जानकी झा अध्यापिका व कवयित्री कटक-ओडिशा 9438477979

खेल कराते मेल

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 खेल कराते मेल ============ राष्ट्रीय एकता की मिसाल  देखना चाहते हो तो खेल और खिलाड़ियों को देखो। देश के अलग अलग राज्यों अलग अलग जिलों, क्षेत्रों से कोने कोने से अनदेखे अन्जाने, भिन्न भिन्न संस्कृति सभ्यता संस्कार, जलवायु में रचे बसे भिन्न जाति धर्म भाषा वाले खिलाड़ी एकता का पाठ हमें सिखाते हैं, खेलों के जरिये आपस में मेल, मैत्री भाव जगाते हैं। एक टीम के रूप में  सबसे पहले भारतवासी होने का संदेश हमारे बीच फैलाते हैं, खेलों से हमें मैत्री भाव बताते हैं एक सूत्र में बँधकर सफलता का विजयी पाठ भी हमें पढ़ाते हैं। हम मेल मिलाप कैसे करें? सारी दुनियां के खिलाड़ी  खेलों के जरिये  आखिर यही तो बताते हैं। ◆ सुधीर श्रीवास्तव       गोण्डा, उ.प्र.     8115285921 © मौलिक, स्वरचित

भारत भूमि

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 भारत भूमि  भारत भूमि की शान पर जान भी हम लुटा देंगे । हिमालय की गोद के लिए शीश भी हम कटा देंगे । नहीं यहाँ किसी जांत-पांत  रंग-भेद या धर्म मज़हब से वास्ता हमें । हें एकता सूत्र में बंधे सभी भारत वासी हम। यहाँ प्रकृति भी देती नित नए - नए उपहार हमें । साधु-संतो का लगता यहाँ तांता हैं । राम-कृष्ण भी इसी भूमि में जन्म लेते हैं ।  माँ की ममता के लिए हैं इंसान से देवता भी हैं  तरसते । हें यहाँ कि मिट्टी इतनी पावन गंगा, जमुना, सरस्वती भी यहीं बहती इस भारत भूमि में फिर  आने को दिव्य आत्मायें कठोर तपस्या करती रहती हैं । भारत भूमि के लिए यहाँ बच्चा-बच्चा भी अपना शीश कटा दे। ऐसी पवित्र, निर्मल ,भारत भूमि हैं हमारी ।🙏🙏 ☆ निर्मला सिन्हा  ☆डोंगरगढ़ छत्तीसगढ़

वीर शहीद की गाथा 🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳

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 वीर शहीद की गाथा 🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳 जब भी में लिखूँ अपनी कलम को धारदार करके हे वीर शहीदों तुम्हारे  बारे में ही लिखूँ । 🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳 लिखूँ उन नौजवानों के बारे में जो  हँसते-हँसते सूली चढ़ गए भारत माँ के लिए । 🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳 लिखूँ उन अंखियो के बारे में जो राह तख्ते तख्ते बूढ़ी हो गई । 🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳 लिखूँ उन मेंहदी लगे हाथों के बारे  में जो ठीक से अपना सुगंध भी ना फैला सकी और फीकी पड़ गई जीवन में । 🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳 लिखना चाहती हूँ आजादी के दीवानों की दास्ताँ जो मतवाले होकर देश की रक्षा  पर जाते हैं और अपना सब न्यौक्षावर करके भी लोट नहीं पाते हैं । 🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳 लिखना चाहतीं हूँ उस बच्चे की रोती  अंखियों के बारे में जो दिवाली में इंतजार  करता है अपने पापा के आने का। 🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳 लिखना चाहतीं हूँ उस पल को जब भरे  त्यौहार में कफ़न से लिपटा वीर शहीद  आता है । 🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳 लिखना चाहतीं हूँ उस वीर शहीद के नई दुल्हन के  आँखो के पानी को   लिखना चाहतीं हूँ  हूँ उस बूढ...

साहित्य एक नज़र की प्रस्तुति

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 *साहित्य एक नज़र की प्रस्तुति  "वक्त की बातों में ना आना" काव्य संग्रह का हुआ विमोचन* साहित्य एक नज़र कोलकाता से प्रकाशित होने वाली दैनिक पत्रिका के तीन महीने सफलता के साथ पूर्ण होने के उपलक्ष्य में "वक्त की बातों में ना आना" साझा काव्य संग्रह का विमोचन  भव्यता के साथ 11 अगस्त' 2021 संपन्न हुआ । आज से तीन महीने पहले रोशन कुमार झा 11 मई 2021 , मंगलवार को साहित्य एक नज़र की यात्रा पर अकेले चले थे परंतु आज हम फेसबुक मंच 1100 सम्मानित साहित्य प्रेमियों के साथ साहित्यिक यात्रा कर रहे हैं । आप सभी सम्मानित साहित्यकारों व पाठकों का सहयोग , स्नेह और आशीर्वाद से आज 93 वें अंक प्रकाशित करने जा रहे है । इसी बीच कलकत्ता विश्‍वविद्यालय के स्नातक तृतीय वर्ष की एवं एनसीसी की अपनी परीक्षाओं के बीच भी पत्रिका के किसी अंक को रोके नहीं, बस समय से नहीं प्रकाशित भले नहीं कर पाये ,जैसे आज की अंक को कल प्रकाशित किए लेकिन जब भी किए दिनांक अंक क्रमानुसार किए । साहित्य एक नज़र की एक मधुबनी इकाई है,जहाँ से মিথি LITERATURE , मिथि लिट्रेचर साप्ताहिक पत्रिका थी अब वह मासिक हो गई है , जिसका ...

*पंखुड़ी*

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 *पंखुड़ी* तुम  करो  पंखुड़ी  को  जरा  सा  अलग, फिर  तबस्सुम सा हर शेर खिल जाएगा। ताल   दे दो  अगर   प्यार  के    राग  पर, फिर  तरन्नुम  में सुर  साज़  ढल जाएगा। ख्वाहिशें  थी सुखन  पर न  अल्फ़ाज़ थे, दिल मे  एहसास   थे पर न   हालात  थे। लिख  न पाया  कभी अपने अरमान को, बेतकल्लुफ  कभी   भी  न   जज़्बात थे।  एक  मिसरा   फ़क़त   सी  मेरी  जिंदगी, रहनुमा   शेर   से   बन   ग़ज़ल  जाएगा। ताल   दे दो  अगर   प्यार  के    राग  पर, फिर  तरन्नुम  में सुर  साज़  ढल जाएगा। जुस्तजू    में   भटकते    हुए   दर ब दर, शेर  जो    भी  पढ़े     बेबह्र   सब   पढ़े। हिम्मतें   दो...

शीर्षक-शिव महिमा

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 शीर्षक-शिव महिमा   हिम शिखरों से भोले के, जयकारे आते है, शंख और डमरू मिलकर, शिव कीर्तन गाते हैं। शिव ही गगन धरा भी शिव ही, हमें बताते है, गान संग है गीत भी शिव, हम महिमा गाते हैं। पंचतत्व निर्मित शिव से, शिव रूप दिखाते है, शिव से शव बनने के पथ को, सहज बनाते है। गौरा के पति दर्शन दे कर, भक्ति जगाते हैं, शिव के रंग में रंगी सृष्टि, विष भी पी जाते हैं। श्रावण मास शिवमयी प्रकृति, भू पर आते हैं, विष्णुपदी के आंचल में, आकर बस जाते हैं। पावन हृदय प्रेम की बाती,ज्योति जलाते हैं, अंजुरी भर जल से भंडारी, खुश हो जाते हैं। सीमा मिश्रा,बिन्दकी-फतेहपुर, उत्तर प्रदेश

शीर्षक-ओलंपिक की सुगंध

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 शीर्षक-ओलंपिक की सुगंध  है छिड़ी हुई यश कीर्ति जंग, हर्षित है मन,जन में तरंग। हो गया भानु अब प्रबल आज, लहरा के तिरंगा आसमान, अर्पण तुमको नीरज सुगंध। और स्वर्ण माल,जय-जय का बंद, टकराई कितनी बाहु शक्ति, उतनी चमकी क्षमता जितनी, बन रजत चंद्र तुम मीराबाई, भारत की गरिमा जग में छाई। सागर सी लहराती सिंधु, संघ अपने ताम्र पदक लाई। जय-जय का घोष है चहुँ ओर, आह्लादित हो जन जन का शोर। शिव के डमरू सा दिव्य गान, हॉकी की ऊंची सी उड़ान। उपहार है राखी का भैया? चांदी में मढ़ा तू रवी दहिया। हनुमान लला सी राम धुनी, फैलाई तूने बजरंग पुनी। लवलीना का धाकड़ प्रहार, हो गया विजयी मुक्के से मार। गाता है हिन्द ये यशोगान, रहे विश्व में देश का अमरगान। स्वागत करती माँ भारती, निज देश पधारो, है आरती।     महिमा तिवारी,स0अ0 रामपुर कारखाना,देवरिया-उ0प्र0 9519045863

जीवन की भूल

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 जीवन की भूल ************ माना कि भूल होना मानवीय प्रवृत्ति है जो हम भी स्वीकारते हैं । मगर अफसोस होता है जब माँ बाप की उपेक्षाओं उनकी बेकद्री को भी हम अपनी भूल ही ठहराते हैं, वर्तमान परिवेश की आड़ में उनको गँवार कहते हैं, सूटबूट में आज हम तो माँ बाप की अपनी पसंद की खातिर अपने यार,दोस्तों के बीच माँ बाप कहने में भी शरमाते हैं। बात इतनी सी ही होती तो और बात थी, देहाती, गँवार मान अब तो माँ बाप के साथ कहीं आने जाने से भी कतराते हैं। जिनकी बदौलत और  खून पसीने की कमाई से आज के समाज में हम घमंड से सिर उठाते हैं, बस यहीं भूल जाते हैं, अपने संस्कार बिना परिश्रम हम अपने बच्चों को सिखाते हैं, आज हम माँ बाप को  उपेक्षित करते हैं, कल अपने बच्चों से  चार कदम और आगे जाकर उपेक्षित होते हैं। जानबूझकर की गई भूलों को याद करते और पछताते हैं, क्योंकि अगली पीढ़ी की  नजर में हम आज गँवार बन जाते हैं, जीवन में जाने,अंजाने  भूलों को यादकर पछताते हैं, तब संसार छोड़ चुके  अपने गँवार, देहाती माँ बाप बहुत याद आते हैं। ✍ सुधीर श्रीवास्तव        गोण्डा, उ.प्र. ...