वीर शहीद की गाथा 🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
वीर शहीद की गाथा
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जब भी में लिखूँ अपनी कलम को
धारदार करके हे वीर शहीदों तुम्हारे
बारे में ही लिखूँ ।
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लिखूँ उन नौजवानों के बारे में जो
हँसते-हँसते सूली चढ़ गए भारत माँ के लिए ।
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लिखूँ उन अंखियो के बारे में जो राह तख्ते तख्ते बूढ़ी हो गई ।
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लिखूँ उन मेंहदी लगे हाथों के बारे
में जो ठीक से अपना सुगंध भी ना फैला सकी और फीकी पड़ गई जीवन में ।
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लिखना चाहती हूँ आजादी के दीवानों की
दास्ताँ जो मतवाले होकर देश की रक्षा
पर जाते हैं और अपना सब न्यौक्षावर
करके भी लोट नहीं पाते हैं ।
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लिखना चाहतीं हूँ उस बच्चे की रोती
अंखियों के बारे में जो दिवाली में इंतजार
करता है अपने पापा के आने का।
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लिखना चाहतीं हूँ उस पल को जब भरे
त्यौहार में कफ़न से लिपटा वीर शहीद
आता है ।
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लिखना चाहतीं हूँ उस वीर शहीद के नई दुल्हन के आँखो के पानी को
लिखना चाहतीं हूँ
हूँ उस बूढ़े बाप को सहारा देने वाले लाठी को।
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लिखना चाहतीं हूँ उस बच्चे की उम्मीद
को एक नई आशा को ।
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लिखना चाहतीं हूँ वो कोने में बैठी एक माँ
के अँखियो के पानी को ।
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मैं सलाम करती हूँ उन वीर शहीदों को
जो भारत माँ के लिए अपना सबकुछ न्यौक्षावर कर देते हैं ।
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मैं अपनी क़लम को शायद जितनी भी
धारदार करके लिख लूँ लेकिन लिख नहीं पातीं उन वीर शहीदों की गाथा को ।
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लेकिन मैं लिखना चाहती हूँ देश पर गए उन वीर जवानों को।🙏🇮🇳
जय हिंद जय भारत
निर्मला सिन्हा
ग्राम जामरी डोंगरगढ़ छत्तीसगढ़ से

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