प्रेस मैटर* *राष्ट्रीय साझा काव्य संकलन *काव्यांगन*का हुआ विमोचन*
*प्रेस मैटर*
*राष्ट्रीय साझा काव्य संकलन *काव्यांगन*का हुआ विमोचन*
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साहित्य साधक (अखिल भारतीय साहित्यिक मंच, सहरसा; बिहार) द्वारा राष्ट्रीय स्तर के रचनाकारों की कविताएं पर आधारित एक साझा काव्य संकलन *काव्यांगन* का प्रकाशन हुआ। *काव्यांगन* का संपादन *श्री शशिकांत शशि* तथा *कृष्ण कुमार क्रांति* ने किया। इस पुस्तक का प्रकाशन रंगमंच पब्लिकेशन राजस्थान द्वारा किया गया है।
दिनांक 18 अक्टूबर 2020 को जूम एप के द्वारा ऑनलाइन इस साझा काव्य-संकलन --- 'काव्यांगन' का विमोचन- कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। , श्री कृष्ण कुमार क्रांति के दीप प्रज्ज्वलन तथा शंखनाद से कार्यक्रम का प्रारंभ हुआ। मंच की अध्यक्षता डॉ. राणा जयराम सिंह "प्रताप" ने की। समारोह के मुख्य अतिथि डॉ रामनाथ साहू ननकी जी थे । गणपति वंदना कल्पना निर्मल जी तथा सरस्वती वंदना सपना सक्सेना दत्ता के द्वारा प्रस्तुत की गई। कुमारी जागृति श्रीवास्तव के नृत्य से मंच झूम उठा। श्रीमती व्यंजना आनंद जी द्वारा मंच का बेहतरीन संचालन किया गया। इस साझा संकलन के रचनाकारों द्वारा अपनी-अपनी एक- एक कविता पढ़ी गई ।
कृष्ण कुमार क्रांति ने निर्भया की संवेदना पर अपनी कविता में लिखा - "आज पावन हुआ विहान चढ़ गए सूली शैतान,निर्भया को न्याय मिला जीत गया है स्वाभिमान"। अनुश्री की कविता- तुम नारी को अपनी शक्ति का एहसास दिलाती हुई रचना है। अमर सिंह निधि ने "चेहरे" शीर्षक से अपनी कविता में बताया-- "कितने मासूम से होते हैं चेहरे। कितनी हकीकत छुपाते हैं चेहरे।।" सपना सक्सेना दत्ता ने कहा-- "बहुत दिनों के बाद मिले हो, सच बतलाओ कैसे हो ?" राधा तिवारी राधेगोपाल की रचना, "देश निकाला" में कोरोना महामारी पर व्यंग्यात्मक लेखनी चली है -- "राम के दर पर आज लगा है ताला क्यों?" बहुचर्चित कवि शशिकांत शशि ने अपनी मानवीय संवेदना पर अपनी कविता "फर्ज" के द्वारा बताया कि गरीबी के झंझावातों में घिरा हुआ इंसान, कभी पिता, कभी पुत्र तो कभी पति के रूप में फर्ज के सलीब पर टंगा हुआ नजर आता है। साहित्य के जाने-माने हस्ताक्षर डाॅ. राणा जयराम सिंह 'प्रताप' की मार्मिक और विशुद्ध साहित्य कविता "मां" सचमुच हृदय को झकझोर गई।
अन्य साहित्यकारों में श्री वशिष्ठ प्रसाद, श्रीमती अलका जैन आनंदी, श्रीमती रितु प्रज्ञा, श्री जितेंद्र कुमार वर्मा, श्रीमती संतोष सिंह हसौर,पंकज बजाजआदि ने भी अपने काव्य पाठ से मंच पर खूब तालियां बटोरीं।
*काव्यांगन* लोकार्पण कार्यक्रम में बिलासा साहित्य धारा मंच के जाने-माने साहित्यकारों द्वारा भी काव्य पाठ एव बाल कलाकारों द्वारा मनमोहक नृत्य प्रस्तुतियां दी गई। बाल कलाकारों में क्षितिजा मोरे, इशिता शर्मा, कुमार चिन्मय, नेहा बडगूजर, जागृति श्रीवास्तव, नव्या कुमारी, शिवानी कुमारी, सुमन कुमार एवं अमन कुमार एवं राष्ट्रीय कार्यालय सचिव दिनेश कुमार पाण्डेय जी शामिल हुए। इस कार्यक्रम में सभी साहित्यकारों, समारोह सहयोगी एवं बाल कलाकारों को *काव्यांगन लोकार्पण प्रतिभागिता सम्मान* से भी नवाजा गया। वही साहित्य साधक मंच के मित्र संगठन
बिलासा साहित्य संगीत धारा मंच के संरक्षक और कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्रीमान रामनाथ साहू ननकी जी ने सभी प्रतिभागियों को शुभकामना संदेश प्रेषित किया।
अंत में अध्यक्षीय उद्बोधन में डाॅ. राणा जयराम सिंह प्रताप ने कहा *काव्यांगन* में शामिल सभी रचनाकार बेहतरीन संवेदनाओं के कवि हैं। डॉ राणा ने कहा कि इस कोरोना काल में भी *'काव्यांगन' का प्रकाशन इसके संपादक द्वय श्री शशिकांत शशि तथा कृष्ण कुमार क्रांति की साहित्यिक जिजीविषा का परिचायक है। वे दोनों इसके लिए बधाई के पात्र हैं।उन्होंने बताया कि साहित्य को समाज की मुख्यधारा में लाने का प्रयास भी हम सभी कलमकारों को करना चाहिए।

सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ।
ReplyDeleteसुंदर अति सुंदर
ReplyDeleteउत्कृष्ट
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ReplyDeleteराष्ट्रीय साझा काव्य संकलन के आंगन में एक खुशबूदार पुष्प-- काव्यांगन।
ReplyDeleteसभी रचनाकारों को हार्दिक बधाई।
राष्ट्रीय साझा काव्य संकलन के आंगन में एक खुशबूदार पुष्प है --काव्यांगन ।
ReplyDeleteसभी रचनाकारों को हार्दिक बधाई।
बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएँ आप सभी को👏👏👏👏👏👏👏👏👏💥🕎🕯🍹🕯⚀👍
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