शीर्षक-ओलंपिक की सुगंध

 शीर्षक-ओलंपिक की सुगंध 



है छिड़ी हुई यश कीर्ति जंग,

हर्षित है मन,जन में तरंग।

हो गया भानु अब प्रबल आज,

लहरा के तिरंगा आसमान,

अर्पण तुमको नीरज सुगंध।

और स्वर्ण माल,जय-जय का बंद,

टकराई कितनी बाहु शक्ति,

उतनी चमकी क्षमता जितनी,

बन रजत चंद्र तुम मीराबाई,

भारत की गरिमा जग में छाई।

सागर सी लहराती सिंधु,

संघ अपने ताम्र पदक लाई।

जय-जय का घोष है चहुँ ओर,

आह्लादित हो जन जन का शोर।

शिव के डमरू सा दिव्य गान,

हॉकी की ऊंची सी उड़ान।

उपहार है राखी का भैया?

चांदी में मढ़ा तू रवी दहिया।

हनुमान लला सी राम धुनी,

फैलाई तूने बजरंग पुनी।

लवलीना का धाकड़ प्रहार,

हो गया विजयी मुक्के से मार।

गाता है हिन्द ये यशोगान,

रहे विश्व में देश का अमरगान।

स्वागत करती माँ भारती,

निज देश पधारो, है आरती।

   

महिमा तिवारी,स0अ0

रामपुर कारखाना,देवरिया-उ0प्र0

9519045863

Comments

Popular posts from this blog

बिजनौर मे अवैध खनन रोकने के लिए आरटीओ एवं खनन निरीक्षक द्वारा भागूवाला चेक पोस्ट पर किया गया प्रवर्तन कार्य, 07 वाहनों का किया गया चालान

पुस्तक समीक्षा " काव्य साधना "

प्रेस मैटर* *राष्ट्रीय साझा काव्य संकलन *काव्यांगन*का हुआ विमोचन*