कविता ॥ मुसीबत जब भी आता है ॥
कविता ॥ मुसीबत जब भी आता है ॥
रचना ॥ उदय किशोर साह ॥
मो० पो० जयपुर जिला बाँका बिहार
मुसीबत जब भी आता है
रूलाकर चला जाता है
अपना भी साथ छोड़ जाता है
साया भी लुप्त हाे जाता है
मुसीबत जब भी आता है
रिश्ते नाते छुट जाता है
राह में मिलने पर भूल जाता है
पहचानने से इन्कार कर जाता है
मुसीबत जब भी आता है
जग में कोई साथ ना होता है
अपना काँधा भी साथ ना होता है
किस्मत भी रूठ चला जाता है
मुसीबत जब भी आता है
अपना भी पराया हो जाता है
मदद माँगने जब जाता है
चेहरे की रंगत बदल जाता है
मुसीबत जब भी आता है
बुद्धि भी चरने चला जाता है
अच्छे बुरे की पहचान भूल जाता है
दिन भी रात नजर आता है
मुसीबत जब भी आता है
जग बेगाना बन जाता है
जीवन सूना सूना हो जाता है
अवसाद घर कर जाता है।
उदय किशोर साह
मो० पो० जयपुर जिला बाँका बिहार
9546115088

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