शीर्षक-शिव महिमा

 शीर्षक-शिव महिमा

 


हिम शिखरों से भोले के, जयकारे आते है,

शंख और डमरू मिलकर, शिव कीर्तन गाते हैं।

शिव ही गगन धरा भी शिव ही, हमें बताते है,

गान संग है गीत भी शिव, हम महिमा गाते हैं।

पंचतत्व निर्मित शिव से, शिव रूप दिखाते है,

शिव से शव बनने के पथ को, सहज बनाते है।

गौरा के पति दर्शन दे कर, भक्ति जगाते हैं,

शिव के रंग में रंगी सृष्टि, विष भी पी जाते हैं।

श्रावण मास शिवमयी प्रकृति, भू पर आते हैं,

विष्णुपदी के आंचल में, आकर बस जाते हैं।

पावन हृदय प्रेम की बाती,ज्योति जलाते हैं,

अंजुरी भर जल से भंडारी, खुश हो जाते हैं।


सीमा मिश्रा,बिन्दकी-फतेहपुर,

उत्तर प्रदेश

Comments

Popular posts from this blog

बिजनौर मे अवैध खनन रोकने के लिए आरटीओ एवं खनन निरीक्षक द्वारा भागूवाला चेक पोस्ट पर किया गया प्रवर्तन कार्य, 07 वाहनों का किया गया चालान

पुस्तक समीक्षा " काव्य साधना "

प्रेस मैटर* *राष्ट्रीय साझा काव्य संकलन *काव्यांगन*का हुआ विमोचन*