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🌹"पहाड़ो का मधुमास"🌹

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 🌹"पहाड़ो का मधुमास"🌹 जब पहाड़ो पर खिलता है, रसभरा महुआ और पलाश, छा हीं जाता है जैसे यहां पर, चहुओर  मादक  मधुमास। कोयल मिठ्ठू के संग में, मिलजुल कर करता है, मधुकर भी यहां पर प्रवास, जब पहाड़ो पर खिलता है, रसभरा महुआ और पलाश। तब पहाड़ो का भी कठोर, शुष्क अतृप्त मन हर्षाता है, जब यहां जंगलों में महुआ, रसभरा फूल बरसाता है। पिला महुआ और लाल पलाश, का रस में डूबा अंग अंग है, और हरा जंगल जैसे यहां पे, फागुन पर भांग चढ़ा रंग है। भोर में दिनकर की सुनहली, लाली के उठने से भी पहले, मिलती है यहां पे चहुओर, महुआ वसुन्धरा पर फैले। मचलता है पहाड़ी गोरीयों का, पुलकित छलकता नव यौवन, जैसे पलाश के हीं खिल जाने से,  खिल आया इनका सारा जीवन। सर पे टोकड़ी लिए खुश है, अभी प्रत्येक ग्रामीण जन, महुआ के तीव्र सुगंध से अभी तो, अपना पहाड़ बन बैठा है मधुवन। अब सृष्टि का एक यक्ष प्रश्न है, आया त्वरित हम सबके लिए, कोई चुप ना बैठा रहे यहाँ पर, बिना इस प्रश्न का उत्तर दिए। क्या सदियों बाद इस धरा पर, हमारा वंश भविष्य भी आगे, इन फूलों के मीठे सुगंध को, क्या कभी अनुभव कर पाएगा, जब ये जीवन मित्र जंगल, ही नहीं ब...

माँ सिद्धिदात्री

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 माँ सिद्धिदात्री ************ नवम रुप माँ जगदम्बे का माँ सिद्धिदात्री कहलाती है, शंख, चक्र,गदा, कमल मैय्या धारण करती है। कमल आसन पर विराजित माँ कमलासनी भी कहलाती हैं, सिंहवाहिनी मैय्या मेरी सबको बहुत सुहाती है। इनकी पूजा से भोले ने भी सिद्धियाँ बड़ी प्राप्त किये, सर्वसिद्धियाँ मिलती उसको जो सिद्धिदात्री का ध्यान करे। चर्तुभुजी माँ सिद्धिदात्री सब मिल माँ का पूजन,ध्यान करें, अष्टसिद्धि देने वाली माँ के चरणों में हम सब शीष धरें। ✍ सुधीर श्रीवास्तव       गोण्डा(उ.प्र.)      8115285921

शीर्षक-सोच मत मजबूर होकर

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शीर्षक-सोच मत मजबूर होकर सोच मत मजबूर होकर अपने दिल  से आएगा, दौर ए नौ में कोई मिलने सायकिल  से आएगा। हथकरघों ने कर  ली  ख़ुदकुशी  इस  बात  पर, था ये ऐलान ए हुक़ूमत कपड़ा मिल से आएगा। गैस  और  पेट्रोल  ने  नींदे  उड़ा  दीं  आंख  की, एक झटका ज़ोर का बिजली  बिल से  आएगा। बढ़   गईं   सरगर्मियां   बजती  चुनावी  बीन  है, सांप का कुनबा निकल अपने  बिल से आएगा। क्या लगाएगा वो क़ीमत  खेत के  अहसास की, जो पसीना शौकिया  बस ट्रेड  मिल से आएगा। वो स्वयं हो जाएगा  गंगा  के  जल  सा  पारसा, आँसू जब गुज़र कर  रूख़ के तिल से  आएगा। बस्ती ए दिल का अँधेरा दूर कर ख़ुद ए 'शिखा', सोच मत कोई ख़िरद के टॉप  हिल से आएगा। दीपशिखा सागर,वरिष्ठ गीतकार कवयित्री  व गजलगो स्वतन्त्र लेखिका व स्तम्भकार, प्रज्ञापुरम,गुरैया रोड,छिन्दवाड़ा-मध्यप्रदेश

कैकेयी के राम

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 कैकेयी के राम ************ कितना सरल है कैकेयी के चरित्र को परिभाषित करना, स्वार्थी, लालची, पतिहंता कहना, लांछन लगाना पुत्रमोही को अपमानित उपेक्षित करना। बड़ा सरल सा है ये सब जो दुनिया को दिखता है, सारा जग यही तो कहता है। बस ! नहीं दिखता है तो कैकेयी का वास्तविक चरित्र जिसके कारण राम राम से मर्यादा पुरुषोत्तम राम बन गये। सारे संसार में,जन जन में कण कण में बस गये। कितना मुश्किल रहा होगा वो पल जब अपने प्राणों से भी प्रिय  राम को वन गमन कराया, पति मृत्यु का लाँछन अपने माथे पर लगवाया। कोखजाये की उपेक्षा सहना जनमानस की नजरों में एकाएक गिर जाना, परंतु संकल्प, स्वाध्याय से तनिक भी विचलित न होना जीते जी मृत्यु सा अहसास करना एक राजरानी का  चहुँओर से चलते जहरीले व्यंग्य बाण सहना फिर भी न विचलित होना आसान नहीं था। बस एक आस, विश्वास था कौशल्या सुत राम साक्षात विष्णु का अवतार था, कौशल्या को कैकेयी पर अटल विश्वास था, राम पर कौशल्या से अधिक कैकेयी का अधिकार था तभी तो कैकेयी के अंदर इतना आत्मविश्वास था। तभी तो माँ की ममता ममताहीन हो गयी, अपने सिर पर कलंक ले दो वचनों की आड़ ले जिद पर अड़ गई...

शीर्षक-हे राम पुनः पधारो

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शीर्षक-हे राम पुनः पधारो  हे !राम   पुनः      पधारों     तुम, इस धरा  को  पुनः  सवारों  तुम। हर  ओर  अराजकता  फैली  है, रामराज्य की पताका फहराओं। भूख,  दरिद्रता    है   चहूँ  ओर,  लाचारी  का   नहीं   कोई  छोर, हे!   राम    पुनः   पधारों   तुम।  दीन हीन सभी को उद्धारों तुम, रावण  रूपी  इस  कोरोना  का,  फिर    से   आतंक   फैला   है।   जन  जन  भय  से  व्याकुल  है, इसका  संहार  कर  डालो  तुम, हे  !  राम   पुनः    पधारों   तुम।  पिता   पुत्र  में  वो   स्नेह   नहीं,  भाई भाई  में  अब  प्यार  नहीं।  रिश्ता  बंधता  था जिस  डोर से,   अब उस डोरमें व...

माँ महागौरी

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 माँ महागौरी *********** माँ जगदम्बे का अष्टम रूप माँ महागौरी कहलाये, श्वेत वस्त्र आभूषण से अलंकृत माँ श्वेतांबरा भी कहाये। चार भुजाओं वाली मैय्या त्रिशूल डमरु संग सुहाए, शंख, चंद्र, कुंद की महिमा माँ के मन को भाये। वृषभ वाहन धारिणी मैय्या वृषारूढ़ा भी कहलाये, न्यायप्रिय और शांत मुद्रा माँ की मन को बहुत रिझाये। माँ अन्नपूर्णा रूप में भी माँ को पूजा जाये, अमोघ फल दायिनी मैय्या आठ वर्ष की आयु पाये। विपरीत परिस्थिति हो कितनी तनिक न चिंता करिए, धैर्य करो धारण जीवन में ये ही संदेश बताए। ✍सुधीर श्रीवास्तव      गोण्डा(उ.प्र.)     8115285921

कोरोना का संदेश

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 कोरोना का संदेश ************** धरती के प्रबुद्ध प्राणियों माना कि तुम सब संसार के सबसे जहीन प्राणी हो। मगर ऐसा तुम सोचते हो, मेरी नजर में तो तुम बुद्धिहीन ही नहीं सबसे बड़े बुद्धिहीन हो। क्योंकि तुम स्वार्थी हो,निपट कलंकी हो, खुद को इंसान कहते हो, पर इंसान कहलाने के  लायक नहीं हो। गलतियां करके भी औरों को दोष देना तुम्हारी फितरत है, तुम्हें तो अपने आप से भी नफरत है। तुमने तो भगवान को भी हमेशा दोषी ठहराया, अपने कर्मों में कभी खोट न नजर आया, जबसे मैं आया  तुम्हारे तो भाग्य खुल गए भाया। मैं कोई रोग नहीं दहशत भर हूँ, बहुत कुछ देखने सुनने तुम्हें समझाने भी आया हूँ तुम्हारी औकात बताने आया हूँ। क्या तुमने इंसानी धर्म निभाया? अपने माँ बाप,परिवार, समाज को तुमने क्या क्या नहीं दिखाया? लूट, हत्या, अनाचार, अत्याचार षडयंत्र, भ्रष्टाचार का  नंगा नाच दिखाया। प्रकृति से खिलवाड़ किया हरियाली लीलते जा रहे कंक्रीट के जंगल खड़े किये जा रहे मानवता ,भाईचारा, सहयोग,  सभ्यता से कोसों दूर जा रहे, इंसान होकर भी इंसानों सा नहीं जानवरों से भी गये गुजरे हो रहे। अब जब से मैं आया तुम्हें बड़ा दुश...

कविता ॥ अजब -गजब ॥

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 कविता ॥ अजब -गजब ॥ रचना- उदय किशोर साह मो० पो० जयपुर जिला बाँका बिहार 9546115088 अजीब फितरत है दुनियाँ की गजब हसरत है मुनियॉं की यहाँ हर खेल निराली है गरीबों की जेब खाली है गोदामों में अन्न सड़ता है कोई भूखा ही मरता है कोई एक एक दाने को रोता है कोई भूखा ही सोता है यहाँ हर खेल निराली हे गरीबों की जेब खाली है फैंसन का नया जमाना है बदन नंगा दिखाना है लज्जा गुदड़ी में शरमाती है बेशर्मी बिकना में दीखती है दोष उनका नहीं है यारो समय का दोष है प्यारा कोई देशी ही पीता है कोई लुटमचा विदेश भग जाता है कहानी सियासत की भारी है बेईमानों गद्दारों की पारी है यहाँ हर खेल निराली है गरीबों की जेब खाली है। पढ़े लिखे में बेरोजगारी है भूख में लिप्त सत्ताधारी है सिंहासन पे बैठा है अब वो पढकर बेरोजगार रोता है जो यहाँ पर जान सस्ती है लुट के लिये गरीबों की बस्ती है पढ़ा लिखा यहाँ संतरी है अंगूठा छाप मंत्री है यहाँ हर खेल निराली है गरीबों की जेब खाली है निर्धन सरकारी स्कूल में है पढ़ता अमीर इंगलिश में हैं गढ़ता एक स्कूल में खिचड़ी खाता है एक मस्ती में कन्वेंट जाता है कोई हिन्दी में पढ़ता है कोई इंगलिश में लिखता है ह...

अंतरराष्ट्रीय क्षितिज पर हिंददेश परिवार,

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 अंतरराष्ट्रीय क्षितिज पर हिंददेश परिवार, ******************************* दोहा(कतर) इकाई का भव्य उद्घाटन ***************************** हिंददेश परिवार के बढ़ते कदमों की श्रृंखला में आज हम सभी अंतरराष्ट्रीय क्षितिज तक पहुंच ही गये। एक सपना जो हिंददेश परिवार ने देखा,उस सकारात्मक्ता और खुशहाली के सोच, चिंतन, विचारधारा को धरातलीय परिदृश्यों पर लाने के क्रम में आज हमारा आपका, हम सबका प्रयास सूदूर में हिंददेश परिवार दोहा, कतर इकाई के रुप में साकार होकर जनमानस के दिलों में स्थापित होता साफ दिख रहा है।          उक्त विचार हिंददेश परिवार की संस्थापिका/ अध्यक्षा डा.अर्चना पाण्डेय अर्चि ने 18मार्च '2021को दोहा(कतर) इकाई के आनलाइन उद्घाटन और काव्योत्सव के अवसर पर प्रकट किया।      डा.अर्चि ने कहाअपने वैचारिकी और जुनून की बदौलत हिंददेश परिवार अपनी  सकारात्मक सोच और नम्रता की ताकत से सारे संसार ही नहीं अखिल ब्रह्मांड की वैचारिकी को एकदम अलग वातावरण और चिंतन का संदेश फैलाने का निश्चय किया, उसका असर दिखने ही नहीं महसूस भी होने लगा है।उनके साथ हिंददेश परिवा...

शुभवाणी फाउंडेशन के पहले लाइव सेशन में प्रतिभागियों ने बिखेरा जलवा।कार्यक्रम सफल हुआ।

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 * शुभवाणी फाउंडेशन के पहले लाइव सेशन में प्रतिभागियों ने बिखेरा जलवा।कार्यक्रम सफल हुआ। शुभवाणी फाउंडेशन की ओर से आयोजित दो दिवसीय काव्य गोष्ठी के प्रथम दिन देश के अलग अलग राज्यो से आये कवि/कवियित्रियों ने अपनी सर्वश्रेष्ठ रचना प्रस्तुत की। शुभवाणी फाउंडेशन के संस्थापक सौरभ 'शुभ' जी मे संचालक की जिम्मेदारी निभाई तो वही दिल्ली की कवियित्री पिंकी सिंघल जी ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर के कार्यक्रम को आगे बढ़ाया। ऑनलाइन हुए इस पहले दिन के कार्यक्रम में दास बैरागी(मध्यप्रदेश),सुषमा तिवारी(उत्तरप्रदेश), साधना मिश्र(उत्तरप्रदेश), संजय शुक्ला(छत्तीसगढ़) तथा पिंकी सिंघल(दिल्ली) इस कार्यक्रम के मुख्य कवि/कवियित्री रहे।  कार्यक्रम में एक से बढ़कर एक रचना प्रस्तुत किया गया जिसमें विषय 'माँ' भी शामिल था। सुषमा जी और साधना जी ने माँ पर बेहतरीन कविता को सामने रखा तो वही दिल्ली के पिंकी सिंघल जी ने कोरोना के ऊपर शानदार गीत प्रस्तुत करते हुए देश के लोगो को जागरूक करने का प्रयास किया।   कार्यक्रम का आनंद ले रहे दर्शको और श्रोताओं ने भी प्रतिभागियों की जमकर सराहना की। फाउंडेशन के संस्थापक स...

शीर्षक-कोरोना महामारी

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शीर्षक-कोरोना महामारी  आइल   बा   कोरोना   महामारी, बचला     के       करीं     तैयारी। सुना ए बहिनी,सुना  मोरे  भइया, दुइ गज की दूरी, सबसे  बनइहा। मास्क,सेनीटाइजर  से करे  यारी, आइल   बा   कोरोना   महामारी। केहू से  ए  भैया हाथ  न  मिलाईं, हाथ  जोरि  सबसे   जान  बचाईं। हाट -  बाजार     और    नातेदारी, आपन-आपन निभाईं जिम्मेदारी। भीड़भाड़ से अलगे घर में विचारीं, बचला       के      करीं     तैयारी। घर-परिवार के साथ समय बिताईं, जो मिले घर में, साथे मिलि खाईं। प्रेम के दिया घर में फिर से जलाईं, नेह और विश्वास से भगाईं बीमारी आइल    बा    कोरोना   महामारी, बचला       के      करीं      तैयारी। साफ-सफाई पर आप ध्यान रखीं, खुलेआम   कौनो  चीज...

बेशर्म कोरोना

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 बेशर्म कोरोना ************ यह कैसी माया है कोरोना की अजब छाया है, होली में डराया होली की खुशियां डस कर भी इसे नहीं चैन आया, दिन भर सेनेटाइजर से बार बार हाथ धुलवाया। माँ बाप ,दादी बाबा, नाना नानी, चाचा चाची,पति पत्नी बच्चे परिवार, रिश्तेदार,समाज के बीच अपना डर फैलाया। शारीरिक दूरी का ऐसा जहर फैलाया। मासूम बच्चों, बीमारों,लाचारों पर भी न इसे तरस आया, मुर्दों तक को इसने नहीं बख्शा, इसने सबसे भरपूर संबंध बनाया। मंदिर ,मस्जिद,गिरिजा, गुरूद्वारों को इसने बंद कराया। कथा, कीर्तन ,भागवत भंडारे पर अपना चाबुक चलाया। नागपंचमी भी हमनें सूखे सूखे निपटाया, बच्चों से गुड़िया भी हमनें घर में ही पिटवाया। बिन भक्तों भोले बाबा ने सावन को निपटाया, मिलते रहे गले ईद में वो भी न हो पाया। आया गया रक्षाबंधन भी पर इसे समझ न आया, भाई बहनों के अमिट प्यार पर भी अपना पहरा बैठाया। बहना रोये भाई सिसके कोरोना तेरी कैसी ये है माया? ऐसा लगता है कि स्वतंत्रता दिवस का लड्डू भी तू यहीं खाया। कब कैसे कितने दिन में वापस तू जायेगा, या इंसानों के संग रहने है तू आया है। बेशर्मी छोड़ कोरोना अब वापस लौट जा भाया, तेरी मेजबानी मे...

समतावादी कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत के साहित्य पटल पर B R अम्बेडकर जी की 130 वीं जयंती पर उत्कृष्ट काव्यपाठ व प्रस्तुति पर "यश भारती सम्मान पत्र से अलंकृत किया गया,

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 समतावादी कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत के साहित्य पटल पर B R अम्बेडकर जी की 130 वीं जयंती पर उत्कृष्ट काव्यपाठ व प्रस्तुति पर "यश भारती सम्मान पत्र से अलंकृत किया गया,

❤️ "गाँव की पगडंडी" ❤️

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 ❤️   "गाँव की पगडंडी"   ❤️ मेरे गाँव की वो प्यारी पगडंडी, है आज भी जैसे मुझे बुलाती। कभी फैलती कभी सिकुड़ती, कभी सीधी तो कभी है मुड़ती, कहीं गीली तो कहीं सूखापन, रहन बसन के लिए सबुरी मन, सही समय पर ढलना सबको, जीवन डगर चलना बतलाती, मेरे गाँव की वो प्यारी पगडंडी, है आज भी जैसे मुझे बुलाती। कहीं किनारे हैं घने बाग बगीचे, कहीं खड़ी हैं गेंहू धान बलियाँ, कहीं अकड़े अड़े महलों दरीचे, कहीं हँसती हैं गरीब झोपड़ियाँ, मगर बीच मे बहती सरिता सी, जीवन सुख दुःख बहाव बताती, मेरे गाँव की वो प्यारी पगडंडी, है आज भी जैसे मुझे बुलाती। घोड़ा चढ़ जमीन्दार चले तो है चलता चरवाहा हलधर भी, कोई मोटर तो कोई बैलगाड़ी, कोई चरण पादुका भूतल भी, बढ़ना है सब साथ मे चलना, सज्जन हित में कथा सुनाती, मेरे गाँव की वो प्यारी पगडंडी, है आज भी जैसे मुझे बुलाती। संगत पंगत हैं चलतें मिलकर, जैसे पानी संग में रंग अबीर, चले है मौलवी चलें पंडित जी, चले इस पर कवि दास कबीर, हो पंथ अलग पर राह एक है, रोज मानवता का पाठ पढ़ाती, मेरे गाँव की वो प्यारी पगडंडी, है आज भी जैसे मुझे बुलाती। कभी जा खड़ी स्टेशन पर तो, है कभी बजाती घ...

शीर्षक-ओ मातृ मेरी

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 शीर्षक-ओ मातृ मेरी ओ मातृ मेरी,तू सुनले मेरी अब द्वार तेरे मैं आया हूँ ये जीवन भी तो तेरा है मैं शीश झुकाने आया हूँ ।1। सब कहते हैं तू जग कल्याणि  तू ही ज्ञान की देवी हंसवाहिनी  मैं इक आस लिए मैं आया हूँ मैं अपनी व्यथा सुनने आया हूँ ।2। तेरे लिए हम सब बच्चे हैं तू सब की पालनहारी है  जब जब विपत आन पड़े, तूने ही तो की रखवारी है। 3 । तू ही त्रिकुटा,चामुंडा शैलपुत्री तू ही है बन कालरात्रि दुष्टों का संहार करे दे सुख,समृद्धि जीवन को उध्धार करे माँ कात्यायनी रूप में सब पे उपकार करे । 4 । नवरात्र में घर घर मे तेरी ज्योत जले मिट जाय तम,दुख खुशी के दीप जले हूँ सेवक माँ आप का ज्ञान का दीप जलाओ विनती करे कवि अरुण आपसे दर्शन देने आओ ।5 । रचनाकार-कवि अरुण चक्रवर्ती  गुरसहायगंज कन्नौज मो.9795718204

कविता ॥ चलो गाँव की ओर ॥

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 कविता ॥ चलो गाँव की ओर ॥ स्चना = उदय किशोर साह मो० पो० जयपुर जिला बाँका बिहार निर्दयी शहर हुआ बेगाना  चलो गाँव की ओर नहीं है जीवन का पानी दाना चलो गाँव की ओर उजड़ गया शहर का पैमाना चलो गाँव की ओर आओ बनायें नया ठिकाना चलो गाँव की ओर शहरों में अब संस्कार निशाना चलो गाँव की ओर शहर ने छीन ली सबका आशियाना चलो गाँव की ओर आओं खेतों से पायें मेहनताना चलो गाँव की ओर प्रदुषण से है मुक्ति पाना चलो गाँव की ओर दादा दादी से है रिश्ता निभाना चलो गाँव की ओर झरने की मीठा जल है पीना चलो गाँव की ओर प्रकृति के संग संग है जीना चलो गाँव की ओर गुरूजी से है ककहरा सीखना चलो गाँव की ओर नदियों की संगीत है सुनना चलो गाँव की ओर पहाड़ों की है गीत पे झूमना चलो गाँव की ओर दादी से परियों की कहानी है सुनना चलो गाँव की और दादा के काँधे पे मेले है घूमना चलो गॉव की ओर एक सुन्दर समाज है सजाना चलो गॉव की ओर माता पिता का आर्शिवाद है पाना चलो गाँव की ओर पड़ोसी के सुख दुःख में साथ निभाना चलो गाँव की ओर शाम को चौपाल है लगाना चलो गाँव की ओर उदय किशाेर साह मो० पो० जयपुर जिला बाँका बिहार

युवा आशु गोयल ने बाटे मास्क

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 *युवा आशु गोयल ने बाटे मास्क                                                                                              आकाश कर्णवाल चांदपुर:-* समाजसेवी आशु गोयल ने एक बार फिर समाज सेवा का परिचय दिया जिन्होंने आज मंडी समिति परिसर में सभी को मास्क वितरित किए वही सारे मंडी के व्यापारी भी उपस्थित थे जिनमें श्री शैलेंद्र सिंह बब्बू सुबोध गुप्ता जी विमल अग्रवाल सुशील गोयल कपिल गोयल विशाल गोयल अजय मित्तल पवन बाबू पवन अग्रवाल पंकज चौधरी पंकज अग्रवाल राहुल अग्रवाल टीटू गुप्ता मोहित अग्रवाल वासु गोयल अरविंद जोशी सुभाष गुप्ता जी वीरेंद्र राजपूत सौरभ सौरभ चौधरी निखिल निखिल अग्रवाल महबूब अहमद उदय राज सिंह चौधरी दीपक कुमार मंडी वह सभी गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे जिन सभी ने मिलकर सभी से अपील की मास्क लगाएं की दूरी बनाएं बार-बार हाथ धोएं और सभी से अपना दूरी बनाए ...

चांदपुर में दिखा कोरोना क‌र्फ्यू का असर, सड़कें वीरान

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 *चांदपुर में दिखा कोरोना क‌र्फ्यू का असर, सड़कें वीरान                                                                               आकाश कर्णवाल चांदपुर:-* कोरोना महामारी के भयावह होने पर संक्रमण रोकने के लिए वीकेंड पर 35 घंटे का कोरोना क‌र्फ्यू कस्बों में भी कारगर रहा। शनिवार रात आठ बजे से लागू क‌र्फ्यू के चलते शहरी क्षेत्र ही नहीं देहात के बाजारों में भी सन्नाटा पसरा रहा। नगर पालिका व नगर पंचायतों ने संक्रमण रोकने के लिए विशेष सफाई अभियान चलाया और सैनिटाइजर का छिड़काव किया। चांदपुर में में रविवार को कोरोना क‌र्फ्यू का पालन कराने के लिए कोतवाली प्रभारी पंकज तोमर  पुलिस वालों के साथ लगातार नगर में भ्रमण करते रहे। कोरोना क‌र्फ्यू के चलते नगर के सभी बाजार एवं सब्जी मंडी पूरी तरह से बंद रहे। कोरोना क‌र्फ्यू के चलते लोग अपने घरों में कैद रहे।कोरोना क‌र्फ्यू में केवल दवा की दुकानें खु...

माँ कालरात्रि

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 माँ कालरात्रि *********** सप्तम रूप माँ जगदम्बे का माँ कालरात्रि कहलाये, शुभकारी फल देती मैय्या शुभंकारी भी कहलाये। रुप भयानक, डरावनी पर भक्तों को नहीं कमी, दुष्टों का विनाश है करती  काल विनाशिनी माँ। भूत प्रेत सब दूर रहे अग्नि, जल,शत्रु का न भय, ग्रहबाधा का नाश करे कालरात्रि माँ। एकनिष्ठ, नियम,संयम से पवित्र मन,वाणी,काया से, जो भी माँ का ध्यान करे माँ उसकी बाधाओं का पल भर में ही नाश करे। शुभफल देने वाली विघ्नबाधा को हरने वाली, जय कालरात्रि माँ जय विघ्नविनाशिनी माँ। 🖋 सुधीर श्रीवास्तव          गोण्डा, उ.प्र.       8115285921

फ्लाई टू स्काई द्वारा वर्चुअल काव्यसरोवर -2021 ।

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 फ्लाई टू स्काई द्वारा वर्चुअल काव्यसरोवर -2021 । फ्लाई टू स्काई: हमारी उड़ान, हमारी पहचान- युवा कवि महोत्सव  (वर्चुअल काव्यसरोवर)- 2021 कार्यक्रम का आयोजन बड़े ही धूम धाम से हुआ | जैसा की प्रचलन है की कार्यक्रम का शुभारंभ वंदना गीत से किया जाता है| इस कड़ी में श्री लक्ष्मीकांत जी द्वारा वंदना से कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया| कार्यक्रम का संचालन बड़े ही अनोखे अंदाज़ में देवेन्द्र कुमार जी द्वारा किया गया| इस वर्चुअल काव्यपाठ में सुश्री सरिता त्रिपाठी (लखनऊ), श्री अभिषेक कश्यप (गोरखपुर), श्री अब्दुल मजीद (लखनऊ), सुश्री तमन्ना धाकड़ (चित्तौड़, राजस्थान) श्री शिरीष श्रीवास्तव जी (राजस्थान), श्री लक्ष्मीकांत त्रिवेदी जी (लखनऊ), फ्लाई टू स्काई के संस्थापक व संयोजक डा अनिल कुमार मौर्य (लखनऊ) ज़ी एवं देवेंद्र कुमार 'सम्यक' (बाराबंकी) से जुड़कर अपनी अपनी रचनायेँ बड़े ही उत्साह के साथ पढ़कर तालियां बटोरने का कार्य किया| कार्यक्रम संचालक देवेन्द्र कुमार (सम्यक ज़ी) ने बताया की कार्यक्रम  को आयोजित करने में डा अनिल कुमार मौर्य जी ने विशेष सहयोग दिया और साथ ही यह कार्यक्रम आगे भी चलता रहेग...