अल्लामा इक़बाल के जन्म दिन पर योमें उर्दू की शाम माहिर स्योहारवी के नाम से मुशायरे का हुआ आयोजन।

 अल्लामा इक़बाल के जन्म दिन पर योमें उर्दू की शाम माहिर स्योहारवी के नाम से मुशायरे का हुआ आयोजन।



ऑर्गनाइज़र महबूब आलम अंसारी द्वारा हर साल यौमे उर्दू के मौके पर कराये जाने वाले मुशायरे में दूर दराज़ से आये शायरों ने बांधा शमा,


नगर के नूरपुर रोड़ स्थित शगुन बैंकट हाल में बीती रात एक मुशायरे का आयोजन किया गया, जिसमें स्योहारा से बाहर से तशरीफ़ लाये शायरों ने अपने कलाम से खूब वाह वाही लूटी।


मुशायरे का आगाज़ शुऐब असलम अंसारी द्वारा शमा रोशन कर किया गया, शमा रोशन होने के बाद हम ओ सना के लिए माहिर स्योहरवी द्वारा लिखी गई हम्द ओ सना कलीम सहसपुरी द्वारा पढ़ी गई।


माहिर स्योहरवी के ऐजाज में हुए इस मुशायरे में महबूब अंसारी,शहबाज़ जमाल,शुऐब असलम,व मुफ़्ती सदाक़त ने शाल उड़ाकर सम्मानित किया।


नाते ए पाक ज़ुबैर इब्ने सैफ़ी अहरोहिवी ने पढ़ी, हम्द ओ नात के बाद मुशायरे में अपने कलाम से सामईन की वाह वाही लूटने वाले शायरों में जुबैर इब्ने सैफी अमरोहवी, वारिस वारसी देहलवी, नईम नजमी रामपुरी, जुल्फिकार आदिल रामपुरी, जावेद आसी देवबंदी, सनावर किरतपुरी, रियाज हनफी नूरपुरी, यासीन ज़की, गुलज़ार ज़िगर देवबन्दी, कलीम सहसपुरी, के अलावा माहिर स्योहरवी के शेरो को खूब पसंद किया गया।


मुशायरे में पढ़े गए कलामों में ज़ुफुकार आदिल ने पढ़ा "जाने क्या सोच के तस्वीर जला दी उसने,एक निशानी थी मेरी वो भी मिटा दी उसने,, 


देहली से आये वारिस वारसी के इस शेर पर खूब दाद मिली "कोई जाने गज़ल बन गया है,हम गज़ल गुनगुनाने लगे है" 


शनावर कितरपुरी ने कुछ यूं पढा "फिक्र का एक जुगनू शीशे के महल में रख दिया,दिल को सीने से निकाला और गज़ल में रख दिया" 


वही रियाज़ हनफ़ी ने अपने इस कलाम से नवाज़ा "नेवला एक मेरे साथ चला था कुछ दूर,आस्तीनों से कई सांप निकलकर भागे"


नईम नजमी के इस शेर को भी खूब पसंद किया गया "बूढ़े बरगद का उठ गया साया,आ गया सर पे आसमान का बोझ"


वही ज़ुबैर इब्ने शेफ़ी ने कुछ इस तरह का कलाम पेश किया "घर का रुतबा बढाया था जिस शख्स ने, अपने घर मे रहा अजनबी की तरह"


माहिर स्योहरवी भी अपने कलाम पर खूब वाह वाही लूटने में कामयाब रहे "तुमने तो मुझे उसकी भी ताबीर बता दी,जो खाब मेरी आँखों ने देखा भी नही था"


रिटायर्ड डीएसपी इक़बाल की सदारत में हुए आज के इस  मुशायरे के ऑर्गनाइज़र महबूब आलम अंसारी,कन्वीनर फज़ल अंसारी,महमान ए खुसूसी शहबाज़ जमाल व बाबू जहीर आलम अंसारी रहे। शमा रौशन करने की जिम्मेदारी शुऐब असलम अंसारी ने निभाई। मुशायरे का संचालन देवबन्द से तशरीफ़ लाये शायर गुलज़ार ज़िगर ने किया।


लगभग 5 घन्टे चले इस मुशायरे में चौधरी दिलशाद ठेकेदार, हसिनुद्दीन अंसारी, मुफ़्ती मुक़ीम उर्रहमान, दिलशाद अंसारी, शकील अहमद,हाफ़िज मोहम्मद अहमद, दिलशाद सत्तर, निसार अज़ीज, सलीम अंसारी, मौलाना कैफ़ फरीदी,मुफ़्ती सदाकत, मौलाना अकरम कासमी, शमीम मंसूरी, मुफिज उर्रहमान रिंकू,इंजीनियर उबेद उर्रहमान, आदि सेकड़ो लोग मौजूद रहे।

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