शीर्षक - वतन के सपूतों

 दिनांक- 25/12/021

दिन- शनिवार

विधा- स्वतंत्र

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शीर्षक - वतन के सपूतों


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वतन के सपूतों, वतन पे शहीद हो।

तुम ही तो देश की जान हो ।।

वतन के जवानों , वतन पे फिदा हो।

तुम ही तो देश की शान हो।।

वतन के सपूतों ------------------ ।।



अगर कोई हो दुश्मन वतन का।

सिखाना सबक ऐसा उसको।।

आये नहीं फिर नजर वह यहाँ पर।

तुम्हारा रहे डर हमेशा उसको।।

वतन के लोगों , वतन से वफ़ा हो।

तुम ही तो देश की आन हो ।।

वतन के सपूतों ------------------।।



देकर जिन्होंने कुर्बानी अपनी।।                                इस देश को आजाद किया।।

लूट गये चाहे वो मिट गये ।

लेकिन चमन को नहीं लूटने दिया।।

आपस में लड़कर लहू मत बहाओ।

नहीं कम वतन का सम्मान हो ।।

वतन के सपूतों --------------------।।





रचनाकार एवं लेखक- 

गुरुदीन वर्मा उर्फ जी.आज़ाद

पता- ग्राम- ठूँसरा, पोस्ट- गजनपुरा

तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)

मोबाईल नम्बर- 9571070847

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