गीत-" इस तरह दर्द कागज से लिपटा रहा "

 गीत-" इस तरह दर्द कागज से लिपटा रहा "


सर्वाधिकार सुरक्षित 


शब्द मिलते रहे गीत लिखता रहा 

इस तरह दर्द कागज से लिपटा रहा!!


हादसों में गुजारी है सारी उमर 

फिर भी कट न सका जिन्दगी का सफर 

 भावना मिट गयी अर्थ बिकता रहा

शब्द मिलते रहे गीत लिखता रहा !!


साजिशें करते करते मेरे हमसफ़र 

लूट लेते हैं दिल बनके वो रहगुजर 

 आह भरते रहे दर्द होता रहा 

शब्द मिलते रहे गीत लिखता रहा !!


ख्वाहिशें जिन्दगी भर खतम न हुई 

मर गये जो मुहब्बत तो कम न हुई 

अश्क गिरते रहे गम उठाता रहा

शब्द मिलते रहे गीत लिखता रहा !!


मैंने मिलकर खुदा से दुआ मांग ली

कितनी हैरत है तुमसे वफा मांग ली

जख्म मिलता रहा कष्ट होता रहा

शब्द मिलते रहे गीत लिखता रहा!!


स्वरचित-अभिषेक मिश्र

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