धूमधाम से मनाया गया राधा रानी का प्रकट उत्सव

 *धूमधाम से मनाया गया राधा रानी का प्रकट उत्सव         


                                                              आकाश कर्णवाल चांदपुर:-* नगर के मोहल्ला साहूवान स्थित गुरु नेतराम जी के मंदिर में श्री राधा जी का प्रकट उत्सव एवं  श्री राम जी सत्संग मंडल की  34 वा वार्षिक उत्सव  आनंद के साथ    मनाया गया। इस अवसर पर राधा जी के श्री विग्रह का पंचामृत स्नान करा कर उनका  सुंदर वस्त्रों से श्रृंगार किया गया। तत्पश्चात भोग लगाकर  आरती की गई। इस अवसर पर राधा जी की महिमा  का वर्णन करते हुए पं  अजय कुमार कौशिक ने बताया कि राधा जी भगवान कृष्ण की आहलादिनी शक्ति है। राधा के बिना कृष्ण और कृष्ण के बिना राधा अधूरे है। इसलिए राधा के साथ कृष्ण और कृष्ण के साथ राधा का नाम जोड़ा जाता है । उन्होंने बताया कि राधा जी का जन्म नहीं हुआ है अपितु राधा जी स्वयं प्रकट हुई है । पुराणों के अनुसार  आज से  5200 वर्ष पूर्व राजा वर्ष भानु और कीर्तिदा के यहां मथुरा जिले के ग्राम रावल में भाद्रपद शुक्ल अष्टमी दिन सोमवार अनुराधा नक्षत्र मध्यान्ह 12:00 बजे  राधा जी का प्राकटय हुआ। ऐसा कहा जाता है कि राधा जी ने अपनी जन्म के बाद काफी समय तक आंखें नहीं खोली इसी कारण उनके माता-पिता परेशान रहते थे। लेकिन श्रीकृष्ण के दर्शन पाते ही राधा जी ने अपनी आंखें खोली।

   उन्होंने कहा कि कि राधा जी ने अपने मां के गर्भ से जन्म नही लिया। राधा जी की माता ने अपने गर्भ में वायु को धारण कर रखा था ।कीर्तिदा ने योगमाया की प्रेरणा से वायु को जन्म दिया। लेकिन राधा जी  स्वयं की इच्छा से वहां पर प्रकट हुई थी। राधा जी कलिनदजा कूलवर्ती  निकुंज प्रदेश के एक सुंदर मंदिर में अवतरित हुई थी। जन्म के  समय सभी नदियों का जल पवित्र हो गया। सभी दिशाएं खुशी से झूम उठी। वृषभानु और कीर्तिदा ने अपनी पुत्री के जन्म पर लगभग 2लाख गायों का दान ब्राह्मणों को किया ।राधा जी के जन्म के बारे में एक और मत विद्वानों के द्वारा कहा जाता है। जिसके अनुसार राजा वृषभानु जब एक सरोवर के पास से गुजर रहे थे उस समय एक सुंदर कन्या कमल के फूल पर तैर रही थी। जिसे वृषभानु अपने घर ले आए और उसका पुत्री के रूप में पालन पोषण किया माना जाता है कि राधा जी श्री कृष्णा से 11 महीने बड़ी थी लेकिन राधा जी ने तब तक अपनी आंखें नहीं खोली जब तक उन्होंने श्रीकृष्ण के दर्शन नहीं कर लिए ।वृषभानु और कीर्तिदा को यह जल्द ही पता चल गया था कि राधा जी अपनी आंखें मर्जी से नहीं खोल रही हैं ।यह देखकर उन्हें अत्यंत दुख हुआ। इसके बाद एक दिन यशोदा श्री कृष्ण के साथ गोकुल से वृषभानु और कीर्तिदा के घर आते हैं ।तब दोनों ने यशोदा का बहुत आदर सत्कार किया ।यशोदा जी अपने लाल को लेकर राधा जी के पास जाती हैं। कृष्ण के सामने आते ही राधा जी ने पहली बार अपनी आंखें खोली। राधा जी भगवान श्रीकृष्ण को बिना पलक झपकाए देखती जाती है ।भगवान श्री कृष्ण जी राधा जी को देखकर अत्यंत प्रसन्न हुए। इस अवसर पर भागवत प्रवक्ता मिथिलेश मुद्गल ने जन्मदिन की बधाइयां गाकर वातावरण को कृष्णमय बना दिया ।

       श्री रामकृष्ण सत्संग मंडल के उपाध्यक्ष श्री सुखदेव भाटिया ने मंडल की 34 वी वर्षगांठ पर 34 दीपक जलाए ।कार्यक्रम में विकास बस्सी, सम्राट (हर्ष )भाटिया शिवम अग्रवाल, राम कौशिक ,अनुज अग्रवाल, ममता कौशिक खुशी अग्रवाल आदि उपस्थित रहे । अंत में प्रसाद वितरण किया गया।

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