शीर्षक - हे मानव मत हो तू परेशान

 दिनांक 23/11/022(बुधवार)

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शीर्षक - हे मानव मत हो तू परेशान


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हे मानव मत हो तू परेशान।

ऐसे इन दुःखों को देखकर।।

आयेगा सुख का वह पल भी।

संघर्ष तेरा यह देखकर।।

हे मानव मत----------------।।


यह दुःख और मुसीबत ही तो।

कसौटी है इस जीवन की।।

इन पर ही होकर विजय।

लिख विजयगाथा जीवन की।।

हार जायेगी मुसीबतें सब।

यह हिम्मत तेरी देखकर।।

हे मानव मत ---------------------।।


आदत है दुनियावालों की।

औरों के दुःख पर हँसना।।

अपने पाप और कमियों को।

पर्दे में छुपाकर रखना।।

सलाम करेगी यही दुनिया।

तेरे पुण्य कर्मों को देखकर।।

हे मानव मत---------------।।


ऑंसू बहा मत मंजिल में।

ऐसे दुःख- काँटें देखकर।।

मत हो निराश और उदास।

खुद को अकेला देखकर।।

होगा खुशियों से आबाद तू।

इन दुःख-काँटों से ही लड़कर।।

हे मानव मत----------------।।





शिक्षक एवं साहित्यकार-

गुरुदीन वर्मा उर्फ जी.आज़ाद

तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)

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