शीर्षक - ओ मेरे हमदर्द

 दिनांक 19/11/022(शनिवार)

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शीर्षक - ओ मेरे हमदर्द


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ओ मेरे हमदर्द वहाँ हो , नियमों का तेरे द्वारा पालन।

तू रहे वहाँ सुखी हमेशा, आबाद हो तेरा घर आँगन।।

ओ मेरे हमदर्द----------------------।।


रखना इज्जत सदा तू वहाँ, बाबुल की पगड़ी की।

रखना शान हमेशा वहाँ तू ,भाई की चुनड़ी की।।

रखना याद हमेशा वहाँ , माँ की ममता का आँचल।

ओ मेरे हमदर्द ---------------------------।।


कम नहीं हो कभी हमदर्द , तेरी इस मेहन्दी का रंग।

रहना हमेशा वहाँ खुशी तू , अपने साजन के संग।।

रखना खुश सबको वहाँ तू ,और महका वहाँ चमन।

ओ मेरे हमदर्द -----------------------------।।


करना रक्षा वहाँ तू हमेशा, अपने इस सिंदूर की।

नहीं कम हो कभी ज्योति वहाँ, तेरे इस नूर की।।

रखना हमेशा तू वहाँ, अपनी नियत- दिल पावन।

ओ मेरे हमदर्द ---------------------------।।





शिक्षक एवं साहित्यकार -

गुरुदीन वर्मा उर्फ जी.आज़ाद

तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)

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