शीर्षक - एक वह है और एक आप है

 दिनांक 21/10/022(शुक्रवार)

----------------------------------------------------

शीर्षक - एक वह है और एक आप है


-----------------------------------------------------

एक वह है और एक आप है।

बात सीधी,सच्ची और साफ है।।

एक वह है और--------------------।।


हम तो दोनों के लिए नहीं अलग अलग।

किसकी नजरें यहाँ,कितनी साफ है।।

एक वह है और----------------------।।


वह बैठाते हैं हमको अपनी पलकों पर।

उनके दिल में, क्यों नहीं कोई पाप है।।

एक वह है और----------------------।।


उनसे ज्यादा प्यार हमने तुमको किया है।

फिर भी हमारे साथ, क्यों नहीं आप है।।

एक वह है और-------------------------।।


पूजते हैं खुदा को वह भी, आपकी तरह।

उनकी तरह दिल से, क्यों नहीं आप साफ है।।

एक वह है और ----------------------------।।


रिश्तें बनते नहीं कभी, किसी से दौलत से।

सिर्फ दौलत को ही तो,चाहते आप है।।

एक वह है और--------------------------।।





शिक्षक एवं साहित्यकार-

गुरुदीन वर्मा उर्फ जी.आज़ाद

तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)

मोबाईल नम्बर- 9571070847

Comments

Popular posts from this blog

पुस्तक समीक्षा " काव्य साधना "

बिजनौर मे अवैध खनन रोकने के लिए आरटीओ एवं खनन निरीक्षक द्वारा भागूवाला चेक पोस्ट पर किया गया प्रवर्तन कार्य, 07 वाहनों का किया गया चालान

स्वास्थ शिविर में की जांच