शीर्षक - सच होता है कड़वा

 दिनांक 24/09/022(शनिवार)

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शीर्षक - सच होता है कड़वा


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सच होता है कड़वा, हकीकत में।

सच की मिलती सजा है, हकीकत में।।

सच होता है कड़वा---------------------।।


बेच क्यों देते हैं लोग, सच को ऐसे।

करने को मौज आराम, लेकर पैसे।।

शर्म आती नहीं क्यों, करते ऐसा।

सच से डरते हैं लोग,हकीकत में।।

सच होता है कड़वा----------------।।


नहीं है जिन्दा ईमान, लोगों में अब यहाँ।

झूठ- फरेबी का धंधा, बढ़ रहा है यहाँ।।

राजनीति का हथियार भी, झूठ है।

सच के दुश्मन बहुत है, हकीकत में।।

सच होता है कड़वा-------------------।।


मुसीबत में वतन है, बदली है फिजा।

नहीं चैनो- अमन है, फैली है खिजा।।

नहीं करो ऐसे बर्बाद, वतन झूठ पर।

सत्यम शिवम सुंदरम, हकीकत में।।

सच होता है कड़वा------------------।।




शिक्षक एवं साहित्यकार-

गुरुदीन वर्मा उर्फ जी.आज़ाद

तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)

मोबाईल नम्बर- 9571070847

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