शीर्षक - अभी बचपन है इनका

 दिनांक  28/08/022(रविवार)

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शीर्षक - अभी बचपन है इनका


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अभी बचपन है इनका।

नहीं बनाओ मजदूर इनको।।

उम्र पढ़ने की है इनकी।

अभी पढ़ने दो इनको।।

अभी बचपन है-----------------।।


हाथ कोमल है इनके।

मासूम चेहरे है इनके।।

शरीर नाजुक है इनका।

खेलने दो अभी इनको।।

अभी बचपन है -----------------।।


मत डालो इनपे ,भार परिवार का।

सपना चुनने दो इनको,इनके संसार का।।

मजदूरी के लायक, ये अभी नहीं।

इनकी मंजिल, चुनने दो इनको।।

अभी बचपन है -----------------------।।


बाल मजदूरी, एक महापाप है।

बालविवाह भी , एक अभिशाप है।।

इन फूलों को , अभी खिलने दीजिए।

गृहस्थी में , नहीं बांधों इनको।।

अभी बचपन है --------------------।।





साहित्यकार एवं शिक्षक-

गुरुदीन वर्मा उर्फ जी.आज़ाद

तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)

मोबाईल नम्बर- 9571070847

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